Uttarakhand Stories

चल मेरे दोस्त जरा साथ में जी लेते हैं

by Manoj Bhandari
Jun 01, 2016

चल मेरे दोस्त जरा साथ में जी लेते हैं..
इन ऊँचे पहाड़ों की, संग में थोड़ी दुरी तय कर लेते हैं..

आजाद पंछी की तरह इस गगन में लहराएंगे,
कितना सुन्दर है अपना गॉव ये सबको बतलाएंगे..

मदमस्त होकर घूमेंगे, इन खेत-जंगलों और पहाड़ों में..
गर्मियों में खाएंगे काफल, और बुरांस चखेंगे जाड़ों में.

थक लगेगी हमे अगर तो, इन बांज के पेड़ों की छाऊँ में बैठ जाएंगे.
भूख लगेगी चिंता न कर, माँ के हाथ का बना खाना खाएंगे.

ना जाने बाकी सारे यहाँ रह क्यों नहीं पाते..
सड़कों से मत जाना दोस्त.. इनसे जाने वाले कभी लौटकर नहीं आ पाते.

नदी से नहीं कहेंगे कुछ भी, वो बहुत बहाने सुनाती है..
सुना है शहरों तक जाती है, पर एक संदेशा तक नहीं पहुंचती है.

लाख विनती करी थी हमने नदी से, पर एक न उसने मानी थी.
बोली में नदी होकर शहरों में बदल गई, तेरा दोस्त तो बस एक प्राणी है.

चले गए सब दोस्त छोड़ कर..बस तू ही मेरा सच्चा यार है.
कोई कुछ भी कहे, कुछ भी सोचे.. मुझे तो बस अपने गांव से प्यार है.

Manoj Bhandari


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2 Responses


Manoj Bhandari Says

धन्यवाद, ये व्यथा लगभग गॉव में बचे हुए सभी बच्चों की है.

s s bisht Says

गाँव की वयथा को ता्रकिक एवं मारमिक वर्णन । अति सुंदर।