Uttarakhand Stories

How can we promote the agricultural productivity in Uttarakhand?

by Manoj Bhandari
Nov 07, 2015

Result of Facebook Daily Contest #36

And the winners is:

1.

Yogesh Pandey

Yogesh Pandey

Agriculture is the main occupation of Uttarakhand state as it is mostly covered by forests so a very small amount of land is available for cultivation. Also, the cultivable land area in plain and hills vary. With the adoption of better management practices, agriculture can prove to be a life-changer for the Uttarakhand people and the UK economy. Following practices can be followed to increase the productivity.

(a) Plain areas (Dehradun, Haridwar etc) which contain fertile lands are irrigated by rivers and groundwater. Excessive use of insecticides and pesticides makes the soil infertile. Overexploitation of water resources results in the decrease in the water table. Controlling the use of chemicals and publicizing the benefits of organic farming and judicious use of water resources will help.

(b) The soil in the hilly areas is prone to erosion. Also, moisture retentive of soil is poor. The terrace farming bet on rain water only. Encouraging the water management techniques like rainwater harvesting, drip irrigation ensures continuous water feeding to crops. Growing trees near the land, making small dams (check dams) will somehow put a barrier to soil erosion.

(c) Our state is popular in fruit farming. We mainly produce litchi, peach, guava and pear. Proper education and training by govt. organisations will improve the fruit production.

(d) Horticulture is also an important part of the UK economy. Promoting use of organic manure will yield better quality vegetables which have high market value.

(e) With the advantage of cool climatic conditions, the hills of UK are favourable to medicinal plants farming. There is a huge demand for the medicinal plants in the market. Motivating and guiding people in this field will improve their financials.

(f) Encouraging and educating people in cattle farming, dairy products marketing, Apiculture(Honey farming) will boost productivity.

(g) Most of the people working in agriculture domain are ignorant of modern art and technologies of farming. The above techniques cannot be mastered without the govt. intervention, establishment of agricultural universities which promote research and development, educating the youths of Uttarakhand and drawing their attention to the profit making agriculture are some of the futuristic steps that need to be taken by govt.

(h) Establishing “Seed banks” will provide good quality seeds(GM seeds) having high productivity and resistant to pests at affordable rates.

(i) Though the green revolution has increased our agriculture production, but the side effects are the excessive use of harmful chemicals. With the advent of “Organic Agriculture” whose products are high in demand and high in market value need to be publicized by the state government.

(f) Agriculture has huge potential in making high profits.The Punjab and Haryana regions are the good examples. It is high time for the state govt. to promote agriculture as a business activity which can give good profits.

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Besides the above winners, we also found the following comments worth appreciation:

Mahesh Khetwal

उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से दो क्षेत्र में बटा हुआ है- 1. भाभर क्षेत्र और 2. पहाड़ी क्षेत्र।
भाभर में खेती करना उतना कठिन नही जितना पहाड़ो में है… भाभर क्षेत्र में मशीन और आधुनिक औजार का उपयोग करके खेती करना आसान हो जाता है। इसमें कोई संदेह नही है
कि जितनी मेहनत भाभर में लोग खेती करने में करते है उससे 3 गुना मेहनत पहाड़ो में किसान करते है। पर पहाड़ो में पैदावार उतना नही मिल पाता जितना भाभर में मिलता है और पहाड़ो में ज्यादातर खेती बारिश पे आधारित है, जिस साल बारिश सही से नही होती है तो उस साल पैदावार कम हो जाता है। पहाड़ो में कृषि को बढ़ाने के लिए निम्न चीजे करनी पड़ेगी।
1. मिट्टी को लैब में भेजकर उसकी गुणवत्ता की चांच कराये और उसी के हिसाब से खेती करे।
2. जिस उचाई पे जो खेती उपयुक्त हो, वही करे।
3. जो फसल कम पानी मांगती हो, उसी फसल की बुवाई करे।
4. यूरिया खाद की जगह, गोबर का इस्तेमाल करे। क्योंकि यूरिया इस्तेमाल करने से साल दर साल मिट्टी की उर्वरक शक्ति कम हो जाती है और पानी भी ज्यादा मांगती है। जैविक खेती को बढ़ावा दे।
5. सरकार जहा तक हो सके वहा नहर के जरिये पानी मुहैय्या कराये।
6. सरकार को पहाड़ी किसानो के लिए TV में रोज एक प्रोग्राम करना चाहिए, जिसमे किसानो को उन्नत खेती करने के विधि बताये और अखबार में उनके लिए एक आर्टिकल छपना चाहिए।
7. पहाड़ो में खेती के लिए उसी के हिसाब से मशीन और औजार बनाये, जैसे डीजल से चलने वाला छोटा ट्रैक्टर।
8. सरकार को किसान के लिए helpline शुरू करनी चाहिए, जिससे किसान समय समय पर सुझाव लेते रहे।

Himanshu Bisht

सबसे पहले में आपको अवगत करा दू की उत्तराखंड में पलायन के कारण लगभग 40% उपजाऊ भूमि बंजर हो गयी है । और बाकि बची भूमि पर पुराने तरह से खेती की जा रही है । अगर हमें कृषि में सुधार करना है तो सबसे पहले बंजर भूमि फिर से उपजाऊ भूमि में तब्दील करना होगा । कृषि सुधार हम निम्न तरह से कर सकते है ।

(1) सबसे पहले सभी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना होगा ।
(2) सिचाई के लिए नहर या कुए बनाये जाएँ ।
(3) उत्तराखंड के पयार्वरण और वहा की खेती की स्थति को देखते हुए उचित फसलों का चयन किया जाना चाहिए ।
(4) लोगों को कृषि के प्रति जागरूक करना चाहिए ।
(5) सरकार द्वारा कृषि संबंधी कार्यक्रम चलाने चाहिए जिससे लोग कृषि को रोजगार समझे और अपनी आजीविका का साधन बनायें ।
(6) उत्तराखंड में 75% खेती सीढ़ीनुमा जगहों में होती है जो पूर्णरूप से बारिश या मानसून पर निर्भर करती है इसलिए वहा पर खेती करने की स्थति में बदलाव होने चाहिए और कम पानी वाले फसलों या सब्ज़ियों को उगाने वाली बिधि को अपनाना चाहिए ।
(7) यातायात के साधनों में भी सुधार की आवश्यकता है जिससे नई तकनीकी को प्रयोग करने में सहायता मिले ।

वैसे तो बहुत सारे सुधार बाकी है अगर ऊपर लिखे ही सुधारों पर गहराई से काम किया जाये तो कम से कम वहा के लोगों को अनाज, सब्जी और फल फूल बाहर से खरीदने की आवश्यकता नही पड़ेगी और सरकार को भी बाहर से ये मुलभुत चीजें आयत कम करना पड़ेगा और निर्यात में बृद्धि होगी ।

ऊपर मैंने वही बात कही है जो हम कर सकते है| जो एक समय सीमा के अंर्गत किया जा सकता है.

Prabhakar Bhatt

हमारा पहाड़ सभी गुणों से संपन्न है | खेती के लिए यहाँ वो सभी परिस्थितियां हैं जो चाहिए जैसे कि सिंचाई के साधन, उपजाऊ मिटटी एवम मेहनती लोग आदि | हम लोग कृषि के परम्परागत तरीकों में कुछ बदलाव कर भूमि कि पैदावार बड़ा सकते हैं|

१. कृषि की स्कूली शिछा एवम
भूमि की पैदावार बढ़ाने के लिए जैविक खाद पर जोर|

२. परम्परागत फ़सलों जैसे धान एवम गेंहू की वजाय कुछ नकदी पस्लों जैसे अदरक, बाजरा, मक्का एवम सब्जियों की खेती बदल बदल कर करना जिससे भूमि की उर्वरकता भी प्रभावित न और लाभ भी जायदा हो |

३. किसान सेवा केन्द्रों की मदद लेना जिससे उन्ननत किसम की बीज मिल सके और फसलों में कोई रोग ना हो |

४. आजकल देखा गया है की कुछ लोग मेहनत कर अच्छी फसल तो तैयार कर लेते हैं लेकिन जंगली जानवर ( सुवर , बन्दर ) एवम पालतू पशु उनको समय समय पर हानि पहुंचाते हैं | जिसके लिए सोलर करंट तार- बाढ़ का इस्तेमाल करना और लोगों को भी अपने पशुओं के लिए उचित चरगाह की व्यवस्था करना जिससे इसको नुकसान ना हो | ये आपसी मेल जोल से ही संभव है |

५. पहाड़ों में जब से पलायन हुवा है तब से ही कृषि का ग्राफ गिरा है| कृषि अब केवल ये सोच के की जाती है की खेत खाली ना रहें या लगान ( अधेल ) पर दी जाती है जो की कृषि के लिए एक अभिशाप है| हल लगाने वाले लोग पहले घर घर में १० लोग थे पर अब पुरे गाओं में १० या उससे भी काम जिस कारन होड़ में मनमानी कीमत ( ध्याड़ी ) वसूली जाती और खेती निपटाने में ही निपट जाती है | हमें फिर से अपने खेतो की तरफ मुड़ना होगा क्यूंकि ईश्वर उसीकी सहायता करता है जो अपनी आप करे|

अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
धन्यवाद ||

Ashutosh Ankit Rawat

उत्तराखण्ड में कृषि के विकास की अपार स्मभावनायें हैं. जिसके लिऐ सरकार को और हम सभी लोगों को ग्रामीणों को कृषि शिक्षा,आर्थिक मदद, नये कृषि यत्रं देने की अति आवशयकता है| मैं खुद भी जब आर्थिक रुप से सक्षम हो जाऊंगा तो पहाड़ भी खेती करना चाहुंगा और मैं पहाड़ी फलों व सब्जियों की कृषि करुंगा और साथ-साथ में अपने आसपास के ग्रामीणों व उत्तराखण्ड सदुर ग्रामीण क्षेत्रों को नई जैविक कृषि और समार्ट कृषि का लाभ देना चाहता हुँ जिससे पर्वतीय कृषि का विकास अत्यधिक और उत्तराखण्ड के सभी धनी लोगों से यह विनीती करना चाहता हुँ वह भी उत्तराखण्ड की सुंदर पर्वतीय कृषि को बढ़ावा देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें और हमारे ग्रामीणों कों नई कृषि तकनीकों व अन्य प्रकार की कृषि में साहयता प्रदान करें जिसके कारण हमें स्वास्थ के लिए लाभदायक खाना मिल सकें और पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों का अधिक से अधिक भला हो सकें| उत्तराखण्ड सरकार से यह विनती हैं की पर्वतीय कृषि को जीवत रखने के लिये वह अधिक प्रयास करें और किसानों को सस्ते दामों में बीज ,जैविक खाद और नई तकनीक के पर्वतीय कृषि यंत्र प्रदान करें और उत्तराखण्ड की कृषि को बचायें और सरकार ग्रामीणों को कृषि शिक्षा जरुर दें|

Ajay Papnai

We need know organic farming but ye itna asan ny hota lkin sasta OR LAMBA tarika h
aj sikkim phla state h jo organic fadming ka use krti h with modern technic
iske liye ek cycle ki zarurt hoti h jisme cow ka ahem role hota h iske gober se hum fertiliser
k sath pesticide ki trh b istemal kr skte h bs dunia m isi ka gobr h jisme kide ny hote
fr humko apne khet ki soil or vaha k tmp k hisab se achi fasal milti h lkin ab khet ko 6 mahine k liye khali chodne ki zrurt ny h
uski bdle hum usme hari sbjiya ugaye jo kheto ki takat naturally vapas le ata h…
Lkin ye tarike ka use hume hr gaon ko eksath krvana hoga use ek achi shuruat milegi…
Or seeds hume humesha achi quality k hi lene chahiye usi ko bar bar istemal krne s b fasal bekr hoti jati h…
Or esi fasal bht takatvr hoti h…
I hope so kbhi pura uttarakhand organic farming samjhega or karega….

सुदेश घिल्डियाल

By using advance farm practice like using new hybrid seed, grown high yielding verities suitable for particular location of soil, soil testing, using DAP in place of Urea, CHAKBANDI in village areas, using multiple business with agriculture like poultry, milk production etc so we can use intergrated management of all possible resources & waste material from one activity will used in other activities…if anybody got any problems in farming call kishan call center 18001801551 or call to agriculture officer of Block level, in every block 1 agri officer appointed for farmer..

Pawan Pant

1. “MRIDA SWASTHYA HAI UNNAT KRISHI KA AADHAR”. Testing of soil should be there before sowing of any crop. soil testing is a basic requirement of current scenario because nowadays our soils have been deficient in Macro as well as micronutrients.

2. Separate use of chemical fertilizers or organic manures can not improve agricultural productivity so we have to promote the formula of ” INTEGRATED NUTRIENT MANAGEMENT FOR SUSTAINABLE AGRICULTURE”.

3. Nowadays government is issuing Soil Health cards for farmers for improving their awareness about agriculture and production.

4. Along with soil fertility, selection of seed, irrigation water, climatic condition are the important factors. The selection of any seed variety should be according to environmental conditions, availability of irrigation water and other biotic & abiotic factors.

5. Rainwater harvesting is the best technique for improving crop production.

6. There are Agriculture technology centers in state agriculture universities so Farmers should have in contact with agriculture scientists of universities and others government employees which are working in the agriculture department.

7. Kisaan Call centers and Kisan Sewa Kendra should be there in district level by which farmers may know about the recent and advanced technologies about the modern agriculture.

गोपाल सिंह बिष्ट

समय के साथ खेती के तरीको को बदलनी पड़ेगी।

Farming in Uttarakhand

कुछ बदलाव करने पडेंगे।।।

Use of technology for farming in Uttarakhand1

Manoj Bhandari

Manoj Bhandari


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