Uttarakhand Stories

Which is you favourite Pahari cuisine and Why?

by Manoj Bhandari
Oct 17, 2015

Result of Facebook Daily Contest #16

And the winner is:

Winner of Uttarakhand fest 2015

Savita Pandey

I relish all kumauni dishes but I love bhat ki chudkani, sana hua nibu the most specially bhat ki chudkan which my mother used to make. Now my mother is no more but remembering the taste still brings water in my mouth. I am a cook myself but the taste of my mothers bhat ki chudkani is the best. Sana hua nibu I miss in winters we used to add radish, honey, sugar and bhang ka namak in it. It used to taste awesome. I remember one memory from my office where I and my Delhi friends made sana hua Nimbu in office, one of my friend brought bhang salt with chilli powder and we also added honey, sugar for having the same taste like my childhood. We searched a perfect place outside the office and it was the  lawn where sun rays were coming and we all sat on the ground and started having sana hua nimbu all the passers-by were turning back and smiling at us and wondering what great thing we are eating and enjoying. It was a great day. I love this forum which connects us with our culture and I love to follow and read all the posts here.

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Besides the above winners, we also found the following comments worth appreciation:

Brijmohan Bisht

मुझे गाँव की ‘घाड’ में पकड़ी हुई छोटी मच्छी (तररे) की पट्वादी बहुत पसंद है|साथ में भात, कोद्दे की रोटी और भटों का साग| सब कुछ चूल्हे में बना हो तो मजा तिगुना| क्यूंकि यह सब कुछ हम अभी भी अपने गाँव में उगाते हैं, तो इसका मजा हम अभी आसानी से ले पा रहे हैं| (बस कुछ वर्ष और ) जहाँ तक पसंद की बात है तो इस से ज्यादा स्वादिस्ट, पूर्ण आहार और पौष्टिक आपको और कुछ नहीं मिलेगा| I want to add some more  सभी मित्रों ने इतने स्वादिस्ट पहाड़ी व्यंजन बताये के मुह में पानी आना पक्का है| हमे ये व्यंजन अपने घरों में बनाने चाहिए जिस से इन्हें आने वाली पीडी भी जान सके| पहाड़ में बनाये जाने वाले सभी व्यंजन से कुछ पुरे वर्ष बनाये जाते हैं तो कुछ मौसम अनुसार| हम पहाड़ियों का खाने के तरीका भी मौसम के अनुसार बदलता है| सर्दियों में हम सुबह ही भात दाल खा लेते हैं और दिन में हल्का नास्ता करते हैं| क्यूंकि दिन छोटे और रातें लम्बी हो जाती हैं| आप सभी से यही अनुरोध है के अपने व्यंजन की तरह अपने उत्तराखंड की बाकि सभी चीजों को कभी मत भूलियेगा|

Mayank Rawat

मुझे मंडवे की रोटी बहुत पसंद है गुड़ और घी के साथ मंडवे की रोटी खाने का आनंद ही कुछ और है बचपन से ही मैं मंडवे की रोटी बहुत पसंद करता था और एक बारी में मैं 4-5 रोटी खा जाता था। मेरी इस ज्यादा रोटी खाने की आदत को छुड़ाने के लिए एक बार मेरी माँ ने मुझसे कहा कि मंडवे की रोटी खाने से काले हो जाते हैं। चूंकि मैं काफी गोरा था इसलिए मुझे उस वक्त उनकी बात सुनकर थोड़ा डर लग गया। ऐसा इसीलिए क्योंकि मंडवे का आटा थोड़ा काला होता है तो मुझे लगा कि कहीं काला आटा खाकर मैं भी काला ना हो जाऊं। और बस उसी दिन से मैंने मंडवे की रोटी खाना कम कर दिया। लेकिन अब इस बात को सोचता हूँ तो अपने ऊपर हसीं आती है।

Birender Sargwan

मे थे कोदे की मोटि रोटी जै मा घरया घी, घरया शील बट्टा मा पिसूए लून, छाछि कु गिलास, सुबेर लेकि नाश्ता मा। दाल घरया छीमि की भात हमर सयरा का चावल को थोड़ी राई की भुजि, मुला की कचबोली, ककड़ी प्याज को सलाद एक आध दुनाला दिन मा। राति सब कुछ चल्द धपडी,बाड़ी,भात,दाल,भुजि कुछ बि कद्दू करेला लिंगडवा इसकोश और सूं चणा शिघंन चयों पलाक राई प्याजा का पता माछा और गेहु कोदे की मिक्स रोटी सच मेरी मा यह बनाती थी कुछ इससे भी ज्याद आज मुझे नाम भी याद करने मे परेशानी हो रही है। पर घर के इस खाने के लिए हम सब भाई बहन ये सब चीज अपने ही खेत से अपने जंगलो से अपनी न्यार से पा लेते थे एहि बात मुझे अछि लगती थी। आज शहर में खाने में एक सब्जी भी लेना कितना महंगा है। मेरी मा 5-6सब्जी दो मिनट मैं बनाती थी। घर के चुल्हे की रोटी दाल की भोरी रोटी हा सच कहुं मुजे chacindo बहुत पसंद है इस को खिला कर ही मेरा ददरा (छोटी माता की बीमारी) ठीक हुवा था। सच मुझे आज मेरा बचपन ताज़ा करा दिया है। धन्यबाद। गलत लिख गया हो तो प्लीज माफ़ करना -आखिर मैं पहाड़ी दगड्या हूँ उत्तरांचल का।

Shyam Joshi

वैसे तो अपना हर पहाड़ी खाना पसंद है पालक का कपा मेरा बेहद पसंदीदा खानों में से एक है जो सेहत के हिसाब से भी बहुमूल्य है और ये हमारे पहाड़ो में काफी होता है उसके बाद भट्टी राजड़ और गहत के डुबके जो हमारे पेट के लिए लाभदायक साबित होता है और साथ में मड़ुए की रोटी कुड कुड वाली उसके ऊपर घर का बना हुआ घी
डली वाला साथ में गुड़ की डई आह रंगत आ जाती है महाराज।

Narendra Tiwari

क्वाद (मंडुवा या चून) की रोटी और भंगुल की की चटनी मेरा मनपसंद नाश्ता है, खासकर अब सर्दियों में क्वाद की मोटी-मोटी गर्म रोटियों पर गाय का शुद्ध घी और साथ में भंगुल (धनिया, टमाटर और अदरक के साथ) की चटनी का मज़ा ही कुछ और है। इसके आलावा गैथ की भरी रोटी, फाणू और तोर की दाल मुझे बहुत पसंद है। 
एक खास बात, हमारी अधिकतम पहाड़ी फसलों का उत्पादन जैविक (Organic) खाद से होता है, तो सिर्फ स्वाद ही नहीं सेहत की दृष्टि से भी ये लाजवाब हैं। भंगुल और जख्या जैसी फसलों की उत्पादन लागत कम होती है और बाजार में मॉंग भी बहुत अच्छी है, जो कृषि की दृष्टि से एक अच्छा विकल्प है। २०१३ में श्री बद्रीनाथ जी और श्री तुंगनाथ जी की यात्रा से लौटते समय चंद्रापुरी में मिला एक गढ़वाली व्यंजनों का खजाना। 

Pahari Food

Pahari food menu, Photo src: Narendra Tiwari.

विवेक डंगवाल

पहाड मे उगने वाली हर फसल शुद्ध और स्वास्थवर्धक होती है पहाड मे जंगलों मे भी खाने योग्य एेसी एेसी सब्जियां व फल मिलते हैं जिन्है एक बार खाकर उनका स्वाद कोई नहीं भूल सकता।
वैसे मे स्वाद के मामले मे कुछ ज्यादा ही बिगडेल हूं मुझे हर कोई भोजन पसंद नहीं आता
लेकिन पहाडी भोजन कुछ भी हो सब अच्छा लगता है।
मेरी पसंद के भोजन की लिस्ट लम्बी है-
सलाद मे –
दूनागिरी की लाल मूली और हरी पहाडी ककडी जसमे सिलबट्टे मे पिसा हुआ लहसुन मिर्ची वाला नमक पडा हो
खाने मे-
झोई-भात, जिसके साथ थोडा हरी सब्जी भी हो
या भट का राझड साथ मे मिलाने को दूध
या मूली के काप के साथ भात
या पालक के पत्तों का काप
या चुडकानी के साथ भात
या मडुएे की रोटी के साथ बडे बडे लाल पत्तों वारी राई का साग या घी गुड या बिच्छु घास की सब्जी
या मक्के का चीला चाय के साथ
या गेंहू की रोटी के साथ लिंगुड की सब्जी
और मीठे मे झुंगर की खीर या घी से तर मडुऐ के आटे की बाडी या गेंहूं के आटे की लापसी।

Aman Rawat

वैसे तो मुझे सभी पहाड़ी व्यंजन पसंद हैं। बात चाहे साग-सब्जी की हो या मांसाहार की सभी के अपने अपने स्वाद और सेहत के लिए लोकप्रिय है। और जिस सब्जी में जक्खिया का तुड़का लग जाये तो फिर बात ही कुछ और है। मेरे पसंदीदा व्यंजन हैं- कोदे की रोटी मा भांग कु पिसू लोण, चैंसा, भट कु चुटकाणी, कददू भात, भट की राबड़ी, झोली, पिसू लोण मा ककड़ी, सोंटिया, आलू कु थिच्वाणीयां, झ्नागोरू।

Ankit Kumar

Madwe ki roti k saath kandali ka saag
Ek yaad: Mai hotel management k food festival me gaya tha vaha garhwali vyanjan the jisme ek thali thi jisko naam diya gaya tha GARH KALYO. Usme sabhi vyanjan bahut swadist the unme se ek kandali ka saag bhi th
a us samay nahi maaloom tha ki saag kandali ka hai, maaloom hota to shayad hi khata but khane k baad itna tasty laga ki 2 bar aur kharid k khaya ab niyamit khata hu.

Beena Rawat

Mujhe kode ki roti bahut achi lgti hai usme ek alag hi taste hota h Jo or kisi m nhi or jab bhi m use khati hu to meri bachapan ki yade taaza ho jati hai. Jab mai or mere bhai bahan koi b kode ki roti khate to hamare bade. Tauji taiji name chicane k liye kahte the ki ye roti mat khao kalle ho jaoge ab jab bhi hum khate h kode ki roti tab tab hamare face par ek tarah ki khushi hoti h. Jai Uttrakhand!

दीपा कांडपाल

मुझे पहाड़ का कोई सा भी शाकाहारी भोजन हो सब पसंद आता है लेकिन मेरा सबसे ज्यादा पसंदीदा भोजन झोई भात और चावल के सफ़ेद जौ जो छा में पकता है और बिन नमक के होता है, उसके ऊपर शिलबटें पे पिसा नमक चटपटा पीले रंग का जो होता है वो नमक डाल के जो जौ का स्वाद आता है। वहाँ क्या कहना मज़े आ जाते है और वैसे उत्तराखंड का भोजन का स्वाद का बेहतरीन मज़ा लेना (चखना) है तो वो स्वाद तो वहीं अपने उत्तराखंड की भूमि (गावं घर)पे ही जाकें मिलेगा और जगह कहीं भी कोई भी अपना पहाड़ी व्यंजन बना लो उसमें वो बात नहीं रहेगी जो पहाड़ के बनाएं घरों में स्वाद आता है क्योँ की पहाड़ के घरों में बनाएं व्यंजन शुद्ध ताकतवर स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम होते है। इनमे मिलावट भी नहीं होती क्योँ की उत्तराखंड भूमि पे उपजाई गई फसलें सब्जियों का ही वहां खाने के लिए अधिकतर इस्तेमाल होता है। वहां के पानी ही इतना स्वाद है की भोजन में इस्तेमाल होते ही भोजन में एक मिठास का स्वाद उभर जाता है और मसाले नमक घर पे पत्थर के शिल पे पीस कर उसे इस्तेमाल करते है। उन मसालों के स्वाद का भी अपना ही मज़ा है और घी घर पे ही शुद्ध तैयार किया जाता है जो अपने आप में ताकतवर खाने की पौस्टिकता बड़ा देता है और जो लोहे की कढ़ाई उसका स्वाद वाह क्या कहना खाने में कुछ भी बनाओं वहाँ भले साधारण तरीके से बना हों होता लज़ीज़ बेहतरीन स्वादिस्ट जो स्वास्थ्य सेहत के हिसाब से उत्तम ही होता है। पहाड़ी खाने की याद है मुझे बचपन में जब गावं जाते थे तो आमा रसोई में खाना बनाती थी तो दिन के खाने के बाद शाम के लिए भी वो खाना हम लोगों के लिए बचा देती थी और उस शाम के खाने को हम सब बच्चे गोट (रसोई) में बैठ के नहीं घर के आँगन में एक ही बर्तन में ऐसे खाते थे चट कर जाते थे, लड़ भी जाते थे की मैं खाऊँगा मैं खाऊँगी करके और ऐसे इकठे एक साथ इस तरह से खाने का स्वाद भी वो पल भी आज भी याद आ ही जाता है धन्यवाद।

Archana Bhagwat

On our trek route, our guide was plucking a lot of furn that too the top portion. He said he would prepare Lengda.He made makke ki roti and Lengda similar sabzi like a green leafy vegetable and when I think of it the taste still lingers.

Gopu Bisht

वैसे पसंद तो मुझे अपनी ईज़ा के हाथ के बने अपने पहाड़ गाँव के सारे व्यंजन हैं पर अगर बात हो रही है सबसे ज्यादा पसन्धिता व्यंजन की तो वो है जाड़ों में “भटिया और पल्यो (झोई)” जो बहुत ही स्वादिष्ट होता है। भटिया बनाने में मेहनत भी भौत ज्यादा लाग्ने वाली ठहरीजिस दिन भटिया बनाना हो उस से पहले शाम को भट्ट को भीगा देने वाले हुये और फिर सुबह उन्हें सिलबट्टे में पीसना ठहरा। उसके बाद बड़ी लोहे की कढ़ाई में भटिया को पकने के लिये आग के चूल्हे में रखना हुआ। समय समय पर उसको चम्मच से हिलना भी हुआ नहीं तो तल लग जाने वाला हुआ कढ़ाई के उबाल भी खुब आने वाला हुआ भटिया और जब तक उबाल न आए मजा भी नहीं आता है बल। बहुत समय लगता है भटिया बनने में ईज़ा सुबह से ही लग जाने वाली हुई गाँव में फिर उसके साथ के लिये मेथी-पालक वगैरा की दही डालकर पल्यो भी बनाने वाली हुई। जिस दिन भटिया बनने वाला हुआ उस दिन मैं केवल भटिया और पल्यो ही खाने वाला हुआ जबकि भात भी बनने वाला हुआ गरमा गर्म भटिया खाने में बहुत मजा आने वाला हुआ। इसलिये यही मेरा सबसे पसन्धिता व्यंजन है पहाड़ गाँव का। इस ‘भटिया’ को कुछ लोग भट्ट के डुबुक भी कहते हैं। पिछली बार तो ईज़ा ने मुझे ही बैठा दिया था भटिया बनाने के लिये सच में मुझे पकाते पकाते बोरियत सी हो गयी बार बार उबाल आ जाने वाला हुआ फिर अंत में ईज़ा को ही आना पड़ा।

 

Manoj Bhandari

Manoj Bhandari


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2 Responses


Manoj Bhandari Says

अपने विचार व्यक्त करने के लिए धन्यवाद, आप चाहे तो पहाड़ी डिशेस को बनाने का तरीके लिख सकते हैं ताकी बाकि लोग जो नहीं जानते वो बनाना सिख सके. हमे खुशी होगी आपके द्वारा दी गई जानकारी साझा करने में.

mohan Says

वैसे तो मै एक शैफ हूं मै काफी सारे इन्टरनेशनल फूड बनाता हूँ पर जब कभी पहाड़ अपने गांव जाता हूँ तो पहाड़ी डिशेज़ मुझे काफी पसंद आते है । मुझे फांड़ु व झंगोरे की खीर काफी पसंद है । ऐड़से तो भावनात्मक जुड़ाव कायम करते हैं अपने पहाड़ से ।