Uttarakhand Stories

How can we promote our culture worldwide?

by Manoj Bhandari
Nov 02, 2015

सवाल: हम अपनी संस्कृति/परंपरा का दुनिया में विस्तार किस प्रकार कर सकते हैं?

Result of Facebook Daily Contest #32

And the winners are:

1.

Winner of contest #32

Mahesh Khetwal

उत्तराखंड एक बेहद खूबसरत जगह होने के साथ एक अलग और साधारण संस्कृति के जानी जाती है… जिसे यहाँ के पुराने लोग उसका पालन कर रहे है… यहाँ की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए निम्न चीजे करनी पड़ेंगी…
1. यहाँ के त्यौहारो लिस्ट आउट करे, यहाँ के हर त्यौह
ार किसी ना से जुड़ा हुआ है और उनका महत्व भी है… जैसे हरेला, पेड़ पौधे लगाने के लिए, जिससे यहाँ हरियाली बनी रहे। घी त्यौहार, पशुधन जोड़ने के लिए। ऐसे ही बहुत त्यौहार है, उसे वर्ल्ड वाइड करना है…
2. यहाँ के रीती रिवाज़ औरो से भिन्न और साधारण है। जैसे कुमाऊनी, गढ़वाली और जौनसारी है… सभी के अलग है। उसे दुनिया में दिखाना होगा।
3. यहाँ का प्राचीन पहनावा, जो दादा दादी लोग पहनते है। जैसे घागरा चोली। यहाँ भिभिन्न समारोहों में पहने जाना वाले कपड़े और आभूषण, जो औरो से अलग बनाती है… उसे विश्व स्तर लाना होगा।
4. अपने यहाँ बनाये जाने वाले विशेष व्यंजन को हर रेस्ट्रॉन्ट के मेनू लिस्ट में डालना होगा। भट्ट की झोली, घौत की दाल, अरबी की सब्जी… ऐसे अनेक व्यंजन है जो सिर्फ हमारे यहाँ बनते है।
5. अपनी बोली को अपनाये। भाषा ही ऐसी ही चीज है जिससे लोगो को पता चलता है की ये अपनी संस्कृति की कितनी इज्जत करता है। दूसरे जगह और शहर में आपस में अपनी बोली में बात करे।
6. टीवी,इंटरनेट और रेडियो के माध्यम से अपनी भूमि का प्रचार और प्रसार करे। जिससे लोगो को यहाँ के बारे में पता चले।
7. अपने लोक नृत्य जैसे छोला चाचेरी ऐसे बहुत से नृत्य है उसका अलग अलग शहरो कें मंच में दिखाना होगा।

Meenakshi Bangari

Uttaranchal: The name in itself hide the beauty of the earth. i.e is “uttar ka anchal” and there are so many ways to promote this beauty and culture. Please have a look at these Points:
1. Create group, pages, and blogs as many as we can on social media sites such as Facebook, Twitter, LinkedIn, WhatsApp and organize quiz and competitions time to time so that in willing of winning prize people will search in google and will come to know about our culture apart from the quiz.
2. Create website from where people can easily get and gather information regarding our culture, festival and about the beauty full places in our Uttaranchal and there must be a facility for people to book tickets for hotels at low prices so that people want to go there due to low price and once they will go there they will see the beauty of Uttaranchal live and will discuss it with other people about it.
3. The best way to promote our culture is to create videos about our traditions, festivals, even a speech describing our culture and upload them in Youtube. Because now a D=days Youtube is the best way to get information about any thing.
4. There must be a mobile app in google play store for our Pahadi songs from which people can download folk music, get information about any festival, dresses and even about places.
5. We can take participate to put stalls of our cultural things in Pragati Maidan and sells thing such as bhat, madua, buras k phoolon ka ras etc. in less price. So that people come and buy them. Once they will aware about these things they will try to purchase these same thing from the next time.
6. There must be also a mobile application like Flipkart, Snapdeal, and Amazon from which people can easily buy our traditional ornaments of Uttarakhand such as nath, pauj, as well as dresses such as pichhoda, cds of famous uttaranchal movies etc. this is one of the best ways to promote our culture.
7. In nanital and in other tourism places we can arrange small stalls for people specially for foreigners with free entry fee where we can place dummy models of beautiful place in Uttaranchal, dummy of dancing girls and doing joda etc etc… even arrange some people to coordinate with them so that can give the answer of foreigner questions and provide information.
8. In malls, we can organize some cultural events and quiz so that people can see and participate in them.
9. We can take help of Google AdSense to promote our culture, we can create ads and post them on the different websites to promote our culture.
10. Last but not least organizing festivals and event in many places of the world time to time so that not only Indian but the foreigners will also be aware of Uttaranchal’s culture and participate in it. I would like to share One of my favourite events which was held in Poland during Holi in which foreigners were dancing. Please have look at this link……
These are certain things through which we can promote our culture. But there is one request to people special to the young generation that don’t shy and hesitate to say that you are a pahadi and speak in front of the people in our native language and perform on pahadi songs at your school and colleges. Because when we start to speak in front of people then they will come to know about us….. this video will defiantly inspire you.

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Besides the above winners, we also found the following comments worth appreciation:

Himanshu Bisht

कोई भी काम तभी सम्भव है जब तक उस काम को हम खुद करैं, यदि हम उत्तराखंड की सभ्यता और संस्कृति को दुनिया में बिस्तार करना चाहते है तो सबसे पहले खुद हम अपनी सभ्यता और संस्कृति का मूल्य समझें, में आपको ये अवगत करा दू की ई उत्तरांचल से जुड़े एक लाख से अधिक सदस्यों में से 70% लोगों के बच्चों को अपनी पहाड़ी सभ्यता, भाषा और संस्कृति का पता नही होगा या कम जानते होंगे|

(1) सबसे पहले हमको अपने बच्चों को अपनी सभ्यता और भाषा से रूबरू करना होगा तथा अपनी संस्कृति को बचाये रखने के लिए घर पर पहाड़ से जुडी चीजे रखनी होगी|

(2) आज उत्तराखंड के लोग पुरे विश्व में अपनी क्षमताओं के माध्यम से अपनी पहचान बनाये हुए है | जो हमे उत्तराखंडी होने का गर्व करवाता है | अगर ये लोग उत्तराखंड में किसी एन जी ओ या सरकार के प्रोग्रामो के माध्यम से उत्तराखंड के संस्कृति, भाषा, सभयता और पर्यटक स्थलों का प्रचार प्रसार करने में अपना थोडा बहुत कीमती समय दें तो इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा|

(3) हर जगह देश हो या विदेश में रह रहे लोगो को अपनी संस्कृति और सभ्यता से जोड़ने वाले कर्यक्रमों का आयोजन किया जाये |

(4) मेरा सभी लोगों से निवेदन है की हमारी संस्कृति और सभ्यता ईमानदारी का प्रतिक है और सेवा भाव इसमें कूट कूट के भरा है कृपया हमारी संस्कृति और सभ्यता को बनाये रखने के लिए कोई भी बेज्जती वाला काम न करें |

धन्यवाद

Harish Bangari Manila

हिमालय की तलहटी में बसा पर्वतीय राज्य उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि के साथ-साथ सांस्कृतिक दृष्टि से भी सुन्दर है उत्तराखंड की संस्कृत सभ्य संस्कृति है और आज यह संस्कृति बिलुप्त होती जा रही है देश में उत्तराखंड ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ अपनी उपेक्षा का शिकार हो रही है 15 वर्षों से यह सिलसिला जारी है
पलायन कर रहे लोग पहाड़ी से निचे उतर कर अपनी संस्कृति अपनी भाषा को भूल जाते है । अपनी भाषा और अपनी संस्कृति की बाते करना उन्हें हीन भावना ग्रस्त कर देता है ।
अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना होगा ताकि यह वैश्विक स्तर पर फैले इसके लिए निम्नलिखित बातो को बढ़ावा देना होगा ।
1: आज पलायन इस अविकृत रूप में होने लगा है कि संस्कृति के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है पलायन कर चुके लोग संस्कृति को हींन भवना से देखते है । इसके लिए पहाड़ो का समुचित विकास करके पलायन को रोकना होगा ताकि हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिल सके ।

2: उत्तराखंड की संस्कृति आज बिलुप्ति के दौर से गुजर रही है । सबसे पहले लोगो को अपनी संस्कृति पर गर्व करना सीखना होगा और आने वाली पीढ़ी को भी इससे जोड़े रखना होगा तभी इसको बढ़ावा मिल सकता है।

3: उत्तराखण्ड की संस्कृति को व्यापारिक रूप देना भी इसको बढ़ावा देगा इसके लिए इसको पयर्टन के क्षेत्र में जोड़ा जाने चाहिए । जैसे – होटल में खाने की सूचि में पहाड़ी व्यंजनों को सामिल किया जाये और सैलानियो को उत्तराखण्डी संगीत से जोड़ा जाये झोड़े न्योली चाचरी और पहाड़ी वाद्य यंत्रो का प्रयोग हो जैसे हुड़का नगाड़ा ढोल बांसुरी आदि इससे कई लोगो को रोजगार भी मिलेगा तो यह सांस्कृतिक ही नहीं रोजगार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

4: उत्तराखंड के मेलो और त्योहारो को वैश्विक स्तर पै जोड़ने के लिये संस्थाओ की स्थापना की जाये जो इन मेलो को पौराणिक रूप देके सांस्कृतिक कार्यकर्मो का आयोजन करेगी और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा ।

5: उत्तराखंड की संस्कृति को वहा के पाठ्यक्रम में सामिल किया जाये ताकि आने वाले पीढ़ी उसे जाने ।
पुराने समय के मकानों दीवालों में हस्तचित्र कला दिखती थी जो आज बिलुप्त हो चुकी है जिसका किसी क पास भी ज्ञान नहीं है इस संस्कृति को शिक्षा से बढ़ावा मिलेगा ।

6: आज के दौर में सोशल मीडिया भी अच्छा प्रचारक सावित हो रहा है तो सोशल मीडिया पर उत्तराखंडी संस्कृति को प्रमोट कर सकते है जिससे पुरे विश्व इसको जाने और पढ़े ।

7: जनता द्वारा खुद को भी अपनी संस्कृति के प्रति जागृत करना होगा ताकि हमारी बिलुप्त होती संस्कृति को नयी पीढ़ी भी जाने और हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिले।

उत्तराखंड की संस्कृति को बढ़ावा मिलना रोजगार की दृष्टि से भी लाभदायक होगा इसके लिए सरकार और जनता को सामान रूप से इससे जुड़ना होगा ताकि उत्तराखंड की संस्कृति विश्व में पहचानी जाये ।

Naveen Naithani

उत्तराँचल निवासी आज के समय में देश विदेश सभी जगह पहुँच गए हैं उन सभी भाई बहनो को अपने पारम्परिक खानपान , वेषभूषा तथा अपनी लोक भाषा को अपनाये रखना होगा जिससे देश तथा विदेश के लोगों उसे देखने और सुनने का मोका मिल पायेगा और वह खुद ही इसकी और आकर्षित होंगे।
किसी भी जगह आपको आपकी भाषा तथा सांसकृतिक रूप रंग ही पहचान दिलाता है।

Avdhesh Bijlwan

किसी भी स्थान का बोध वहां की भाषा से आसानी से हो जाता है। परंतु यह अत्यंत दुखद प्रतीत होता है जब हम पहाड़ी लोग जो कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्र से आते हैं अपनी बोली भाषा को ही बोलने में कतराते हैं यहाँ तक कि यदि कोई व्यक्ति अपनी गढ़वाली कुमाऊनी या किसी भी भाषा का प्रयोग करता है तो उसे गंवार और बैकवर्ड जैसे शब्दों को सहन करना पड़ता है। शर्म की बात तो ये है कि आने वाली पीढ़ियों को भी हम अपनी भाषा से महरूम रख कर खुद को हाई स्टेटस का मानने लगे हैं। नयी उत्तराखंडी पीढ़ी को रैप तो पसंद है पर गढ़वाली गाने नहीं देहरादून में रह कर अपने गाँव को हम पहाड़ बोलना शुरू कर देते हैं। अन्य भाषाओं का ज्ञान होना बहुत अच्छी बात है पर अपनी भाषा को लुप्त ही कर देना ये कहाँ का स्टेटस सिंबल है।
इसलिए मेरा मानना है क़ि स्वयं की भाषा का विकास सर्वप्रथम है। संस्कृति और बोली एक दूसरे के पूरक हैं भाषायी विकास से संस्कृति का विकास और फिर संस्कृति से सम्पूर्ण उत्तराखंड को विश्व मानचित्र पटल पर आसानी से उकेरा जा सकता है।
पहले हम खुद में उत्तराखंड ढूंढे, उत्तराखंड को तो फिर सब ढूंढ ही लेंगे।धन्यवाद।

Bharat Bhakuni

Culture is the heart of Uttarakhand. In today’s interconnected world, culture’s power to transform societies is clear. Uttarakhand is a culturally rich state which is divided into two major regions namely Garhwal and Kumaon. The religious, social and cultural background of Uttarakhand allures the people of Uttarakhand to find an expression in various fairs and festivals, folk dance, music, which are in turn closely linked to the social and economic activities of the region.
First of all promote tourism of all forms, in a broader sense, have a tremendous impact on socio-economic and cultural structures. The tourism industry is very important in Uttarakhand regions. Tourism has largely transformed the socio-cultural entities.
Save and promote Uttarakhand folk dance and music Record old Uttarakhand song, old Uttarakhand music instrument and record lesson how to play it. Run a Uttaranchali library to collect the document information related to the culture of Uttarakhand.
To promote and organize a program event on local art and music and folk dance arranged the art & painting completion, essay writing, group discussions, rangoli, and general knowledge competitions in Kumaoni, Garwali, and Jaunsari dialects.
To promote Uttranchali books, magazines, songs, films, new media, radio and television programs reflect our culture. Cultural industries shape our society, develop our understanding of one another and give us a sense of pride in who we are as a nation.

Manorama Rawat

Mitti se shuruwat karne se. Sabse pahle hum khud apni sansriti ko proud ke sath atmsath kare ghar me apni bhasha.,khanpan,rahan sahan apni sanskriti ko apnaye. Apne bacho ki shadiyo adi me DJ ko hatakar apne paramparik sangeet nritya vadya yantro ka anand le. Pahado ka itna madhur sangeet kisi ke bhi dilo me pyar paida kar sakta hai fir apne bacho ke dilo me apni Sanskrit ke prati pyar paida yakinan hoga or hamare bache hamari sanskriti ko desh videsh tak jarur pahuchayege.mitro mene apne ghar se shuruwat kar di hai ap bhi sath de.

Kuldeep Pant

By not hesitating speaking in our mother tongue while we meet other Uttarakhandis outside our state, by inviting others to lunch while we cook our traditional food, by playing folk songs of Gopal Babu Goswamiji and Negi Ji while we travel with friends to another state, by actively participating in activities organized by Uttarakhand clubs, by letting others know about our great cultural heritages, having a get together with Uttarakhandi friends and discussing about how to promote our culture. Each of these small activities can contribute to promote our culture outside Uttarakhand.

दीपा कांडपाल

उत्तराखंड को विश्वस्तर पे बढ़ावा इस तरह मिल सकता है जो इस प्रकार से है..

उत्तराखंड को संचार प्रसार के माध्यम से मिल सकता है बढ़ावा जैसे टीवी के जरिए रेडियो के ज़रिए इंटरनेट माध्यम के जरिए जिस प्रकार से कई इंटरनेट पे भी पेज ग्रुप संस्थाए संगठन काम में लग
ी हुई है इसके ज़रिए जो लोग वहां नहीं जा सकते या कभी नहीं जा सकें जिनकों अपनी संस्कृति का कुछ पता नहीं उन्हीं लोगों के लिए ये सबसे अच्छा साधन है उन लोगों को ऐसे अधिक से अधिक जुड़ना चाहिए जिससे उन्हें समय समय पर उत्तराखंड की हर एक जानकारी हासिल हो सके !

अपने उत्तराखंड को बढ़ावा देने में अपने पहाड़ का खान पान जैसे खाने की कोई भी चीजें जो जल्द ख़राब नहीं होती दाले सोयाबीन घौत भट्ट रैंस मंसूर मास आदि की दाले,आटा मड़ुआ झुवरा बाजरा मक्का आदि का आटा,मसाले धनिया मिर्च हल्दी लहसुन अदरक जखिया राई सर्सो आदि मसाले ,फल माल्टा नासपाती दाड़िम नारिंग निम्बू आम सेब आदि फल,मिठाई बाल मिठाई जो उत्तराखंड की प्रसिद्ध मिठाई है इन सब खाद्य प्रदार्थो को व्यापार के ज़रिए विदेशों में निर्यात कर सकते है !

पर्यटन टूरिज्म को भी अधिक से अधिक बढ़ावा देना होगा जिससे विदेशों में जो रहते है वो उत्तराखंड देखने घूमने आएं उनको हर सुख सुविधाएं आदर सम्मान मिले अपने घर के नागरिक जैसा जिससे विदेश में बस्ने वाले भारतीय हो या विदेशी नागरिक उनका मन बार बार भारत उत्तराखंड आने घूमने की और लालायित हो !

उत्तराखंड के जो विदेशों में बसे हुए है उन लोगों को आगे सामने आना होगा उनकों वहां पे भी अपने उत्तराखंड के संगठन समूह बनाने होंगे और अपने उत्तराखंड के समय समय पे कार्यक्रम कलाओं का प्रदर्शन आयोजित करवाना होगा जो उत्तराखंड की संस्कृति बोली से सम्बंधित हो यदि वो अपनी उत्तराखंड के प्रति प्रतिभा को बढ़ावा देते है तो इससे भी विश्व स्तर तक उत्तराखंड को बढ़ावा मिल सकता है !

उत्तराखंड को विश्व में बढ़ावा देने के लिए अपनी संस्कृति भाषा रीती रिवाज़ को पहले खुद सम्मान गर्व प्यार अपनत्व के साथ अपनाना होगा तभी हम विश्वस्तर पे बढ़ाने की बात सोच सकते है धन्यवाद !!

Ketan Lohani

According to me, protecting our culture is in our hands. It should begin at the grassroot level. For example, in Punjab and other states, there is a provision that children should learn Punjabi from their early schooling years. Similarly, Uttarakhand can also adopt this plan and teach local dialects such as Kumaouni, Garhwali from their early schooling years. In home too, parents should actively engage their children in planning trips to their native villages, in this way, he will forge a bond with people and will be able to see, experience the customs and traditions. I think books can play a very important role in preserving the culture. We should inculcate a reading habit in all of us if we can document our traditions, cuisines, our local festivals can prove to be a valuable resource for future generations. There can be regular cultural fests, theaters, and even people can come together to form groups to promote their culture like in cities we have samoohik holi. It will not only help in forging bonds but will also bring people together. Uttarakhand is famous as a tourist hotspot and we can use this to promote our culture to other people. I think these steps will surely help in preserving our culture. Thank you.

Anupam Panwar

By encouraging the youth of Garhwal and Kumaun division that we must carry our culture and tradition with us where ever we go and let the world know about our folk dance, songs, and outfit which our people wear in the hills of Uttarakhand. But for that we first need to tell n teach about culture n tradition of Garhwal and Kumaun division to our youth because these days hardly 30% of Uttarakhand youth know about our culture and if we will be able to do that then I don’t think so that there will be need of any kind of paid promotion. Also, by doing this every youth of Uttarakhand will act as a brand ambassador of our state tourism and culture then we will have lakhs of brand ambassadors for our state. Once the youth of Uttarakhand will be aware of their culture and traditions then word of mouth will automatically take place and in this way, the culture of Uttarakhand will be globally known.

Manoj Bhandari

Manoj Bhandari


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