Uttarakhand Stories

Do you think Uttarakhand has achieved its goal as a state or not?

by Manoj Bhandari
Nov 09, 2015

Result of Facebook Daily Contest #38

And the winners are:

1)

Winner of contest #32 Mahesh Khetwal

एक अलग उत्तराखण्ड राज्य बनाने का उद्देश्य था- यहाँ का विकास करना था जैसे सड़के, बिजली, पानी, विद्धालय और स्वास्थ्य की सुविधाये मुहैय्या कराना। यहाँ के लोगो के लिए रोजगार दिलाना।

ये कहना गलत होगा की इन 16 सालो में कुछ नही हुआ है, कुछ हद तक विकास हुआ है, पर उस रफ़्तार से नही हुआ या हो पा रहा है, जिस हिसाब से आजकल की दुनिया चल रही है और जैसा हम चाहते है।
इन 16 सालो में हर जगह बिजली, पानी और संचार की व्यवस्था हर जगह पहुँची है सिर्फ चीन और नेपाल से सटे हुए गाँव को छोड़कर। पर अब हर गाँव को सड़को को जोड़ा जा रहा है। विद्धालय में पढ़ाने की पद्धति और पाठ्यक्रम में कुछ ख़ास बदलाव नही हुए है। वही पुरानी वाली पढ़ाने की विधि चल रही है। स्वास्थ विभागों में चिकित्सको का अभाव होना और स्वास्थ सुविधाओ में 10% का भी विकास नही हुआ है। जिन कारणों से उत्तराखण्ड में विकास नही हो रहा है, वो इस प्रकार है-
1. पहला और सबसे बड़ा कारण है यहाँ के राजनीतिक पार्टी और नेता का जमीनी जुड़ाव का ना होना, जब तक वो ज़मीन से ना जुड़ेंगे, तब तक वो उस जगह की समस्या नही समझेंगे। नेताओ को ज़मीन के साथ साथ लोगो से भी जुड़ना पड़ेगा। वरना नेता लोग इलेक्शन के बाद दिखते नही है।
2. केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार द्वारा दिए गए अनुदान का विकास के लिए सही से उपयोग ना करना। मतलब घोटाला करना और सरकार द्वारा उस व्यक्ति और एजेंसी पर कोई कार्रवाई न करना।
3. जो भी विकास कार्यो में जुड़े हुए है, ज्यादातर अपने विकास में लगे हुए है चाहे नेता हो या ठेकेदार हो।
4. पहाड़ो की बजाय शहरो के विकास को तवज्जो देना।
5. पहाड़ी लोगो को राजनीतिक और कानून के बारे ज्ञान का अभाव होना। जिससे वो भ्रष्ट नेताओ और लोगो के खिलाफ क़ानूनी लड़ाई लड़ सके।
6. पहाड़ी लोगो का पश्चिम संस्कृति कहे या शहरो की तरफ रुझान होना। जिससे हो वो अपने पैत्रिक भूमि को छोड़कर जा रहे है, जिससे उन्हें कोई फिकर नही है, वहा के विकास के लिए आवाज़ उठाये।
7. सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमो, विभागों और सरकारी कर्मचारियों काम के प्रति ईमानदारी और कर्मनिष्ठ ना होना।

2)

Premsingh Sanga

 Premsingh Sanga

1- ऊत्तराखन्ड को कमसे कम १० वर्ष केन्द्र शासित होना चाहियें था।
2- स्थानीय पार्टी UKD के अधिकाँश नेताओँ को अपनी जिम्मेदारी का अहसास नही रहा वो छोटे छोटे स्वार्थों के कारण बिक गये।
3- काँग्रेस व BJP दोनो पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने जिसको भी CM बनाया
उन्होंने अपने कर्तव्यों का सही निर्वाह नही किया।
4- अभीतक किसी भी पार्टी के पास अपना सही vision नही है।
5- जितने भी शीर्ष स्तर पर IAS/ IPS या PCS बाहर से आये वो ज्यादातर भ्रष्ट थे या उन्हैं पहाड़ी सँस्कृति का कोई ज्ञान नही था।
पलायन का सबसे बडा कारण यही है।
6- ऐसे सभी आधिकारियो ने नेताओँ को बस एक ही बात का ज्ञान कराया कि पैसे ज्यादा से ज्यादा कैसे कमाया जा सकता है।
ये प्रक्रियाएं आज तक भी निरन्तर चली आरही हैं । उदाहरणार्थ छोटी छोटी PHC मे medical के महगे उपकरण । २०० करोड़ का ice sketing hall।जो अब निष्क्रिय पडा है। नानक सागर ढैम के करोड़ों रुपये के watter sports उपकरण जिन पर अबतक जाँघ चल रही है। पिछले ७ सालों से कभी कोई खेल नही हुवे ।
7- सारे नेताओँ ने अपने अपने रिस्तेदारो को या तो नेता बना दिया या फिर ठैकेदार।

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Besides the above winners, we also found the following comments worth appreciation:

Yogesh Pandey

The birth of Uttarakhand wasn’t due to the will of the political class but the decade-long movement of the Uttarakhandi people. The great history of perseverance, grit & sacrifice of people still motivates and energises the younger generations. Hats off to them.
A long history of ignoring the hill state in terms of development by the, then state legislature and the ineffective representation in the assembly made the statehood demand bona fide. Consequently, UK was carved out of UP and became the 27th state of Bharat on 9th Nov 2000.

Post Independence, there was an incredible increase in the corruption. The connection between the corrupt politicians, bureaucrats and local admirers channelise the people’s money to their own pocket. Over exploitation of natural resources like sand mining caused loss to state exchequer. No transparent law was there for punishment. Instead of working for state growth they were more keen to feather their own nests.This is the consequence of continually neglecting the potential of Uttarakhand in terms of hydro energy, agriculture, talented human resource, our state is being regarded as a laggard state.
But people effort, desire and determination revived the growth of Uttarakhand. There is confirmation on the growth of UK after the separation.

(a) Road connectivity immensely widened in hill regions.Good road maintenance boosts the tourism in the state.

(b) The tourism sector is booming with a large number of tourists.A significant hill population are earning from this sector.

(c) Before the Independence, most hill regions remained in dark. But faster electric connectivity due to hydropower tapping through dams made Uttarakhand independent in the power sector. We are now able to export power to other states.Our revenue has multiplied many times.

(d) The plain lands of Dehradun, Haridwar, Kashipur, Rudrapur is blooming with industries.The employment indicator is in increasing trend as compared to post-UP government. Per capita income is higher as compared to UP.Poverty reduction rate is higher too.

(f) Good climatic conditions, Improvement in the medical sector, quality education for children etc. has immensely spiked the growth of real estate/housing market. The rise in demand for homes is quite visible.

(g) People of UK are more educated than U.P. as per the survey of 2011. The literacy rate especially female literacy rate is reaching new levels.

15 years is quite a long time for a state but we should not forget that Uttarakhand started work from the scratch. No doubt that the pace of development is sluggish.We still lag in some areas. The reasons are not hard to tell: Corruption from the top to bottom, frequent changes in the govt. due to conflicts, lack of visionary leaders, non-uniform development model. This indeed is detrimental to the Uttarakhand growth structure. But aspiration of restructuring Uttarakhand and achieving the tempo of growth is still in the minds of Uttarakhandi people.
A healthy elected visionary &discerning administration, efficient bureaucracy, transparent law for corrupted politicians &goons, people’s positive role and attitude will definitely accelerate the pace of growth. Time has come for the younger generation to actively participate in state’s renovation.

Abhi Sharma

There were actually three reasons for which the state of Uttarakhand was carved out of Uttar Pradesh on November 9, 2000, and they are as follows:
1) Poor development of the hills,
2) Unemployment, and
3) Time-taking distance from hills to Lucknow in case one has to approach officials in the state capital.

I don’t say that there has been no significant development but not satisfactory or as per the requirement. There a number of problems such as no road connectivity, no proper water supply, no proper electricity. If we come to the second factor i.e. increasing unemployment, this problem is in status quo. Youth comes to Dehradun, Haridwar, Udham Singh Nagar, Selaqui in search of jobs. Some get good jobs but most of the people don’t and they are forced to move to the metropolitan cities in search of it. No specific market for hill crops at outlying places. No effective employment scheme. There are various departments in the state in which thousands of vacancies are yet to be filled but no recruitment notice has published so far. Most of the paper get leaked that results waste of money and time of students. Now we take stock of the reason no. three i.e time-taking distance from hills to Lucknow in case one has to approach officials in the state capital. This is the only reason which became fruitful because Dehradun is our state capital and it covers around all facilities. But as Gairsen is proposed to be a summer capital, I am doubtful that it will create obstructions in official work until it becomes a fully developed area.

Sanjay Pathak

जब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य से राजनैतिक और सरकारी विकास की धूप पहाड़ी बहुल उत्तराखंड के घरों में ना के बराबर पहुँचती थी ,ऐसे में ठंड से कराहते सीधे साधे उत्तराखंडियों ने अलग राज्य का सपना बुना | कामयाब भी हुए….लेकिन उन्हें क्या पता था कामयाब तो राजनीति के वो खिलाडी हुए जो खुद को पहाड़ का बेटा कहते नहीं थकते…क्या खूब किया कागजों में मेरे उत्तराखंड का विकास…ऐसे में देवभूमि में देवों का सहारा….

Bhagatdarsan Bisht

नहीं हुआ।क्योंकि जिन्होंने आंदोलन किया वे घर पर है क्यों की उन्होंने निस्वार्थ भाव से उत्तराखंड की उन्नत्ति के लिए किया था।
और जिन्होंने उस समय वर्तमान सरकार का साथ दे कर आंदोलन का विरोध किया था वे आजकल पदों पर विराजमान हैं।
तो विकास किस प्रकार से होगा
?
सभी को दिल्ली व् देहरादून रहना है तो विकासः किस प्रकर से होगा ?
पहाड़ों में हॉस्पिटल,स्कूल व् सरकारी विभाग खोलने के बजाय देहरादून,हरिद्वार,ऋषिकेश,हल्द्वानी और दिल्ली में अपनी अपनी कोठियां बनने की होड़ है तो पहाड़ो का कैसे विकासः होगा ?

Parwati Pokharia

कोई फायदा नहीं हुआ है ? क्यों कि सड़कों का निर्माण ठीक तरह से नहीं हुआ है, अभी भी दूर दराज के गांवों में बिजली सड़क मार्ग की परेशानियों से लोगों को जूझना पड़ता है । पलायन के कारण सकूलो में पढ़ने के लिए बच्चे ही नहीं हैं । सुविधा न होने के कारण सब अपने बच्चों को गांव से शहर को चले गये हैं, नेता जातिजातिवाद में लग जाते हैं गांव ,राज्य की कोन सोचता है, इसलिए कोई फायदा अभी तक तो नजर नहीं आ रहा है ।,

Tarun Nayal

निसंदेह , नहीं ।
‌ उतरांचल/उतराखंड राज्य की स्थापना इस पर्वतीय क्षेत्र की उतर प्रदेश सरकार द्वारा लगातार उपेझा करना अाैर भाैगाेलिक कारणाें की वजह से इस क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिये लखनऊ जाना अव्यावहारिक हाेना था। लेकिन भारतीय गणतंत्र
में राज्यों की स्थापना माैलिक रुप से क्षेत्रीय भाॉषा एवं संस्कृति अलग हाेना समझा जाता है। उतरांचल/ उतराखंड का सांस्कृतिक ताैर पर उतर प्रदेश के शेष क्षेत्रों से भि्न्न हाेना और इस क्षे्त्र के राजनीतिक प्रतिनिधियों का यहां की समस्याओं का प्रभावशाली रुप से न रख पाना , इसके प्रमुख कारण थे । दु्र्भाग्यवश राजनीतिक प्रतिनिधित्व का स्तर बढने के स्थान पर अाैर गिर गया। राजनीतिज्ञ अपने स्वार्थ में समय गंवाते रहे और अाज राज्य के १६ साल पूरे हाेने पर प्रदेश का अपेक्षित विकास नहीं हुआ, यहां तक कि मूलभूत सेवाओं का भी विकास नहीं हाे पाया। प्रदेश सांस्कृतिक तौर पर अपनी अलग पहचान बनाने में एकदम असफल रहा है। प्रदेश में विकास की अत्यधिक संभावनाऐं हैं। पर्यटन, जल विधुत ऊर्जा, मत्सय उद्योग, जड़ी- बूटी विज्ञान, फल बागवानी में राज्य अाज तक अग्रणीय हाेना चाहिये था, लेकिन परिणाम सर्वविदित हैं। परिणाम-स्वरुप स्वास्थय, शिक्षा परिवहन इत्यादि मूलभूत सेवायें राज्य में अाज तक पर्याप्त रुप में विकसित नहीं हो पायीं। एक छोटा सा सवाल राज्य की स्थायी राजधानी बनाने का था परंतु अाज तक राज्य की स्थायी राजधानी बन नहीं पाई है। शायद नवनिर्मित राज्य तेलंगाना अपनी राज्य की स्थायी राजधानी बनाने में उतरांचल से आगे निकल जाये। सरकारें आज तक ग्रामीण क्षेत्रों के विकास , शहरी विकास की सुविधाओं को उपलब्ध कराने में, महिला सशक्तिकरण, युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कराने में, अंतिम मील संपर्कता स्थापित कराने इत्यादि कार्य करने में लगभग विफल रही हैं। सरकारें पलायन की समस् या को सुलझाने के प्रति भी गंभीर नहीं रहीं । युवा पीढ़ी, प्रदेश से बाहर स्थापित बुदधिजीवी वर्ग को नई दिशा देनी होगी अन्यथा उत्तराखंड भारत की राज्यों की सूची में केवल अपनी उपस्थिति मात्र शेष रह जायेगा ।

Premsingh Sanga

गतवर्ष इन्हीं दिनो दैनिक जागरण की रिपोर्ट भी काफी सही बयाँ करती है।

Uttarakhand as a state

 

अखबारों की ये सुरखियाँ मेरी बातको तसदीक करती हैं ।

Uttarakhand as a State

Manish Kathait

Vikas huwa par hmara nhi bhar ke logon ka .hmare uttarakhand ke logon ne yha rhkr kam krne ya koe vyvsaye krne ke bjaye bhar jana shi smja jisse ki bhar ke logo be yha kam kiya v apne vyvsay kiya .or hmare log bs kam hi dundte rhgye.yiska prinam yha huwa ki aaj hme lgta hai ki yha vikas nhi huwa .jb hmne kosis hi nhi ki to vikas kha she hoga .ydi bhar ke kisi wyakti she phucha jaye jisne Uttarakhand rajy bnte same yha koe kam ya vyvsaye suru kiya hoga to use pucha jaye ki use ab kitni subidhaye hoti hai tbke mukable to vo yhi khega ki vikas huwa hai.

Rockking Divv

– still they r behind in education facilites…
– they lack expresion of their thought
– teachrs their by supress them to not to express…. orthodox mentality of teachng staff.

– expensive transprtatn. etc.
aur bi h but filhl tk itna hi…

Mukesh Pal

if we see the duration …its only 16 yrs …nd yet we have developed 45%-50% of our state … nd we don’t have to get developed on the cost of our environment ………there is no big role of government whether its state or central …its we people of uttarakhand who let the development to be happen….

Harendra Bisht

Iske kai karan he ..ekmatr chhetriy parti Ukd ka flop show. 2 yha ke netao ka Parsons swarth jo ki sabse bada durbhagya he. 3 pahad ki andekhi kar plen ki taraf logo ka playan hona . 4 hum logo ka hardwork karne se jee churana .5 apni sanskriti se muh mod kar bahri culture ki taraf aakarsan . 6 ghoos de kar le kar apna kaam ho jata he baki pardesh ka kuch v ho koi nahi soch rha he ….anginat kaaran ho jate hai jis taraf kisi ka dhyan nahi jata. . ……….

 

Manoj Bhandari

Manoj Bhandari


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One Response


Devendra Bist Says

It is reverse development.