Uttarakhand Stories

In what ways we can improve the miserable condition of Pahari women?

by Manoj Bhandari
Nov 04, 2015

Result of Facebook Daily Contest #34

And the winners are:

1.

Harish Bangari Manila

Harish Bangari Manila
पुरुषो और युवाओं के पलायन के दौर से गुजर रहे उत्तराखंड के पहाड़ी जिलो में अधिकांश महिलाएं ही घरों को संभालती है और यह बिल्कुल सत्य है की मूलभूत सुविधाओ से वंचित पहाड़ो में जीवन यापन बहुत कठिन है जिससे
यहाँ की महिलाओ की स्थिति बहुत दयनीय है महिलाओ की इस स्थिति में सुधार अतिआवश्यक है जिसके लिए हम निम्नलिखित उपाय कर इस स्थिति को सुधार सकते है –
1: पहाड़ी महिलाओ की इस स्थिति का मूल कारण यहाँ की महिलाओ का अल्प शिक्षित या अनपढ़ होना है आज भी पहाड़ो में उच्च शिक्षा का आभाव देखने को मिलता है अगर देखा जाये तो आज इंटर कॉलेज तो देखने को मिलते है परन्तु स्नातक तक के कॉलेज बहुत कम है और महिलाओं को दूर कॉलेज में पढ़ने के लिए भेजना सुरक्षा की दृष्टि से सही नहीं समझते जिससे महिलायें अल्प शिक्षित रह जाती है ।
सर्व प्रथम सरकार को महिलाओं की उच्च शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देना होगा जिससे महिलाएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपनी इस स्थिति को पहचानेगी और इसका समाधान करेंगी ।
2: पहाड़ी कृषि का प्रौढ़ और बारिश पै निर्भर होना भी महिलाओ का इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है जिसके लिए यहाँ की महिलाओ को उच्च तकनिकी कृषि की जानकारी दी जाये और इसके लिए सरकार द्वारा समाज सेवी संस्थाओ का गठन किया जाये और पहाड़ी महिलाओं को कम सिचाई और अधिक लाभ वाली कृषि की जानकारी निश्चित तौर पै दी जाये ।
3: बेरोजगारी और लघु कुटीर उद्योगों का आभाव से भी इस स्थिति को बढ़ावा मिला है इसके लिये पहाड़ो में अधिक से अधिक संख्या में लघु और कुटीर उद्योगों का निर्माण किया जाये जिससे यहाँ की महिलाओं को रोजगार और कृषि को भी बढ़ावा मिलेगा और महिलाओं की स्थिति में सुधार आएगा ।
4: पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी पहाड़ो का योगदान न के बराबर है जिसके लिये पहाड़ो में पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा देना होगा और सरकार को महिलाओं को स्वयं सहायता समूह जैसे संघठन का निर्माण करने के लिए जागरूक कर उनको गाय भैंस बकरी भेड़ जैसे पशुओ को खरीदने के लिए आर्थिक मदद प्रदान या कम ब्याज दरों पै बैंको से कर्ज मुहैया कराया जाय । पहाड़ो में चारे और हरी पत्तियों की कमी नहीं है और पशुपालन और दुग्ध उत्पादन रोजगार का भी अच्छा विकल्प है ऐसे में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन पहाड़ो महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिये वरदान साबित होगा ।
5: सरकार द्वारा पहाड़ों का समुचित विकास कर भी इस स्थिति में सुधार ला सकेगा आज अधिकांश पहाड़ी गांव सड़क और यातायात के संशाधनों से वंचित है इसके लिए सरकार को पहाड़ो के विकास के कार्य को युद्ध स्तर पर करना होगा जिससे पहाड़ी महिलाये इसका प्रयोग अपनी स्थिति सुधारने में कर सके आज सरकारी योजनाये ढुलमुल स्तर पर चल रही है ।
6: सरकार द्वारा योजनाओ का आकलन किया जाये क्योंकि अधिकांश योजनाओं की सिर्फ घोषणा ही पहाड़ो में पहुचती है योजनाओ का कार्य धरातल पै हो इसके द्वारा सरकार की व्यवस्था की जाये और पहाड़ी विकास की अधिकांश योजनाओ को लागू किया जाये ।

अतः यह कहना गलत नहीं होगा की पहाड़ी महिलाओं का अनपढ़ या अल्प शिक्षित होना, आधुनिक कृषि का न होना और कृषि का बारिश पर निर्भर होना, रोजगार की कमी , और सरकार की सुस्त विकास निति ही महिलाओ के इस स्थिति की जिम्मेदार है और सरकार और जनता को इन समस्याओं के समाधान हेतु आगे आना चाहिए और महिलाओ की स्थिति को सुधारा जाना चाहिए ।

2.
Mahesh Khetwal

Mahesh Khetwal

पहाड़ो में महिलाये ही घर बार संभाले हुवे है… क्योंकि उनके पति शहर में नौकरी कर रहे है या गाँव में मस्ती मार रहे है। बहुत ही कम घर होंगे पहाड़ो में जो पति पत्नी, माँ बाप साथ रहते हो। जो भी पुरुष घर में रहता है वो बूढ़े हो चुके है जो अब काम करने में असमर्थ है या दारू के नशे में दुबे हुए है। बच्चों की देखभाल, खाना बनाना, घर की सफाई, खेत का काम, घरेलू जानवर पालना और उनके घास काटना सब यहाँ की महिलाये करते है…. चाहे बेटी हो, चाहे बहू या सास हो, सब महिलाये ही करती है यहाँ काम। सच में पहाड़ो में महिलाओ की स्थिति ख़राब है। महिलाओ की स्थिति सुधारने के निम्न चीजे करनी पड़ेगी।
1. सारे कामो में पुरुष को महिलाओ के साथ देना होगा। चाहे खेती हो, चाहे घर का काम हो… हर काम में साथ देना पड़ेगा। महिलाओ को काम करने की मशीन न समझे।
2. पुरुषो को महिलाओ को सम्मान देना होगा, मतलब एक समान मानना होगा, आपस में तालमेल बैठाना होगा। शाम को दारू पीके मारने और गाली गलोच करने की बजाय उनके दुःखो को समझे।
3. जो पुरुष शहर में रह रहे हो, उन्हें काम के सीजन (गेहूँ बुवाई और कटाई, धान की बुवाई और कटाई) में घर आना होगा… पति या माँ का हाथ बटाने के लिए। उन्हें घर का खर्चा और जरुरतो को पूरा करने के लिए हर माह ₹ घर भेजे।
4. जो महिलाये आर्थिक रूप से गरीब है… उनके लिए वहा लघु या कुटीर उद्योग स्थापित करे, जिससे वो अपना घर और बच्चों की पढाई का खर्चा चला सके।
5. महिलाओ के लिए कृषि करने के आसान तरीके और उच्च गुणवत्ता फसलो को उगाने के लिए सरकार को स्कीम लाना होगा। फसल ही क्यों साग-सब्जी, मसाले(हल्दी, मिर्च, जीरा,अदरक आदि), फल इन्हें भी उगाने की तरीके बताना चाहिए, वो भी घरेलु तरीको से। जिससे वो बाजार में बेचकर कुछ पैसे कमा सके। खेती करने के लिए पानी दिलाना होगा यानि गधेरों और नदी से नहर के जरिये लाना होगा।
6. सरकार को महिलाओ के विकास के लिए तहसील और जिला स्तर पे उनकी गोष्ठि की जानी चाहिए। उस गोष्ठी में महिलाओ की विकास के बारे बात करे और सभी के सुझावों को समझना चाहिये।
7. ग्राम प्रधान हो या सरपंच हो उनके लिए जगह आरक्षित कर देनी चाहिए। ताकि उन्हें राजनीतिक शक्ति मिल सके और उस गाँव या एरिया में उनके विकास के लिए आना वाला अनुदान का सही उपयोग कर सके।

Besides the above winners, we also found the following comments worth appreciation:

Himanshu Bisht

मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हू, अगर देखा जाये तो महिलाओं के साथ साथ पुरुषों का भी योगदान होता है । उत्तराखंड का 90% भाग पर्वतीय क्षेत्र होने से यहाँ महिलाओं को काफी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है । अगर हम थोड़ी गहराई से देखंगे तो महिलाओं की स्थति काफी दयनीय है । जिससे हम इन समस्याओं को निम्न प्रकार के समाधान से दूर कर सकते है ।

अगर हम इस समस्यां का आधार ठीक करें तो महिलाओं के साथ साथ पुरुषों की दशा में भी काफी सुधार आ सकता है ।

१-सभी बच्चों को उचित शिक्षा दी जाये जिससे वो अपने भविष्य सवार सके. लड़कों और लड़कियों को बराबर समझा जाएँ|

2. प्राथमिक शिक्षा में सुधार किये जाये तथा स्कूल में ईमानदार और अच्छे अध्यापकों की पूर्ति हो ।

3. शिक्षा के साथ साथ खेलकूद भी बच्चों के लिए अनिवार्य किया जाये । जिससे वो अपनी प्रतिभागिता प्रस्तुत कर सकें और उत्तराखंड के बच्चे भी खेलकूद में अपना प्रतिनिधित्व देश के लिए करें ।

4. सभी प्रकार के स्कूल जैसे प्राथमिक, मिडिल, हाई स्कूल, इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज आदि स्कूल की उचित ब्यवस्था की जाये, खाशकर लड़कियों की स्थति में सूधार हो ।

5. महिलाओं के लिए प्रौढ़ शिक्षा का आयोजन किया जाये । और लघु और कुटीर उध्योग खोले जाये ।

6.ग्रामीण लेबल पर महिलाओं को जागरूक करके दुग्ध पालन, बकरी पालन, आधुनिक खेती के लिए एक उचित मंच दिया जाये ।

7. सभी ग्राम प्रधान, सरपंच, ब्लॉक प्रमुख, के कार्यों को सही तरह से जांचा जाये जिससे वहां के लोगों को रोजगार बराबर मिल सके ।

अंत में अगर ऊपर लिखे सारी बातों का निष्कर्ष निकाला जाये तो उचित शिक्षा का न होना, लघु और कुटीर उद्योगों का पतन, लड़के और लड़कियों में अंतर, नौकरशाही की मनमानी तथा सरकार को अपने राज्य के प्रति अनदेखी ही महिलाओं की दयनीय स्थति का कारण है । यदि हम इन सुधारों पर मिल जुलकर काम करें तथा सरकार पर भी महिलाओं की स्थति में सुधार के लिए ऊपर लिखे उपायों पर अमल करने में दबाव डाला जाये तो इसका एक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा ।

यही उपाय महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा और हम सभी को एक परिपूर्ण उत्तराखंड मिलेगा ।

Abhi Sharma

Yes, there is no doubt that women are the backbone of rural Uttarakhand but the bitter truth behind is that their condition is miserable even after 15 years of the creation of the state. The women of Uttarakhand have always emerged as the pillars of the rural economy due to their involvement in agriculture, forest protection, cattle care and dairying. Women in villages sometimes become the heads of the family. They look after the agriculture and cattle when their men go outside for employment. But Starting from birth, girls do not receive as much care and commitment from their parents and society as a boy would. This is the major reason behind their poor condition. If we all initiate some handsome work towards improving their condition, their life can take a feat from down to up. I am suggesting here some ways which are if taken may be proved boon for their life and are as follows:

1) Girl Education: We all know that education is like a pillar and to enhance level in society. When a girl turns 3 years old she should be taken to school. This would not only develop their mind but improve their way also towards hill peoples’ problem. They will be able to discuss all their mind growing with their family.

2) Marriage: I have seen most of the time that in hill areas girls’ marriage is on its apex when they cross their 15. It is not right. It creates problems with their health, productivity (fertility), mindset and etc. While in urban areas girls get marriage at 24-27. In this period, they become able enough to know their responsibilities and all other things.

3) Medical Treatment: Uttarakhand is a newly formed state with Government health services still in the process of formation. In the area surveyed, there was one hospital which had two lady doctors. One was an eye specialist and the other was dealing with all other health problems concerning women. According to the women, they have limited knowledge and took little interest in their patients. Doctors are in clinic very erratically consequently, the women have to suffer.

4) Women’s Rights: Women, constituting the weaker section of the society, are suffering from various problems in every field. Today, the government has initiated various programmes related to Anti-dowry and maternal benefits, but women lack awareness about these laws and rule.

5) Treatment of Infectious Diseases: It was found that improper disposal of waste and working barefoot leads to high instances of hookworm infection in rural areas. Hookworm infection is directly responsible for a high percentage of anaemia among women. It should be terminated by creating awareness and good medical facilities and broad dumping grounds.

6) Gender disparities: Women should not be considered low in society. They should get similar status as of men in the society.

Shyam Joshi

महिलाओं को भी बराबर का दर्ज़ा दिया जाएं सरकारें हमारी हस्त शिल्प कला जैसे सिलाई सैंटर खोले वहाँ पर जिन कार्यो में कम मेहनत हो वो कार्य कराएं जाएं हमारे पहाड़ो में अधकितर काली मिटटी है वहॉ कपास की फसल अधिक मात्रा में हो सकती है और साथ में सबसे बड़ी बात सब्जी लगाने के लिए वहॉ की महिलाओं को हाइबर्ड की बीज मुहैया कराएं इसके लिए गांव की महिला प्रधान उसके साथ टीम बना कर यह कार्य कर सकते है ।

Durga Karki

सबसे पहले पुरुष महिला के कामों में मदद करें ताकि उन्हें अपने लिए समय मिल सके । और सरकार को गाँव में किसी जानकर को भेजना चाहिए जो गांव में जाकर उन्हें उनकी खेती फसल जो भी उस जगह पर होता हो उसके बारे में उन्हें बताये ।बहूत जगह कॅश क्रॉप बर्बाद हो जाती है जैसे नाशपाती आड़ू आम आदि क्योंकि वो लोग उसे मंडियों तक नहीं ले जा पाते है और दूध भी । इसके लिए सरकार को चाहिए कि वो गाँव वालों की जो भी उत्पादन हो उसे समीपवर्ती मंडियों तक पहुचाएं और उन्हें उचित मूल्य दे । इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उनमें कॉन्फिडेंस भी आएगा ।इसके अलावा उन्हें स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना ।उन्हें शिक्छ्या देना जैसे सिलाई पार्लर का काम आदि और उनके बच्चों के लिए अच्छे स्कूल (जहां पर अच्छे से पढ़ाया जाता हो ना कि छिपकली वाला खाना और साफ सफाई कराई जाती होऔर टीचर धूप सकते हो )तो ये उनके लिए सोने पे सुहागा होगा शायद उपरोक्त बातों से उनकी कुछ तो स्थिति सुधरेगी । धन्यवाद ।

Nitin Naithani

यह सच है कि पहाड़ी महिलाओं का जीवन काफी कठोर और कष्टकारी होता है महिलाओं पे न केवल घर के कामों की जिम्मेदारी होती है बल्कि वे अन्य काम जैसे ईधन के लिए लकड़ी लाना, खेती-बाड़ी के काम करना आदि मे भी हाथ बटांती हैं. इस स्थिति को सुधारने के लिए हम कुछ उपाय जरूर कर सकते हैं जैसे ग्रामीण उत्तराखंड मे लगभग प्रत्येक घर मे गाय-भैंस पाले जाते हैं प्रशासन लोगो को गोबर गैस के बारे मे बताए तथा इसके प्रयोग के लिए उत्साहित करे, इससे न केवल पर्यावरण स्वच्छ रहेगा बल्कि महिलाओं को जंगल मे अपनी जान जोखिम मे डालकर ईंधन की लकड़ियॉ लाने की जरूरत नही पड़ेगी, तथा पहाड़ी क्षेत्रों मे लोगों को खेती की उन्नत तकनीको के बारे मे बताए जिससे उनके कठिन परिश्रम को व्यर्थ होने से बचाया जा सके. इसके अलावा प्रशासन विशेषतया ग्रामीण क्षेत्रो मे महिलाओं के लिए कुछ स्वरोजगार केन्द्र चलाए जिससे वे न केवल आत्मनिर्भर बनें बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति मे भी सुधार हो.

Gopu Bisht

सही कहा आपने पूरा ग्रामीण उत्तराखंड महिलाओं पर ही निर्भर है और उन कामकाजी महिलाओं की ही हालत दयनीय है वैसे तो हमारे पहाड़ गाँव की महिलाएं काफी मजबूत और समझदार होती हैं पर उनकी दयनीय स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण है उनका अल्प शिक्षित होना और जानकरियों की कमी। अगर पहाड़ गाँव की महिलाओं को शैक्षिक सुविधाओं के साथ साथ नई नई चीजों की जानकारी हो जाय जैसे कि घरेलू रोजगार और आत्मनिर्भरता के लिये तैयार होने की प्रेणा तो स्वतः ही उनकी स्थिति और भी अच्छी हो जाएगी।
उनकी खराब हालत के पीछे एक और कारण है जो है गाँव गाँव तक शराब का पहुँचना और पुरुष वर्ग द्वारा शराब पी कर घर की महिलाओं के साथ हाथापाई और गालीगलौज करना जिस से महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है और वो अपने आपको कमजोर समझने लगती है इसी स्थिति को हमने ठीक करना है….जिस से कि पहाड़ गाँव की महिलाएं सर उठा कर जी सकें और अपने पर हो रहे अत्याचारों को दबा सके ये तब ही संभव है जब वो खुद शिक्षति और जागरुख होंगी।
वैसे नाम के लिये तो आज महिलाओं को राजनैतिक सामाजिक जिम्मेदारियों में बराबरी का हक मिल रहा है पर वो जमीनी स्तर पर मिथ्या है।

अतः पहाड़ गाँव की महिलाओं की हालत सुधारने के लिये उन्हें शिक्षति और जागरूक करना सर्वप्रथम जरूरी है। बाँकी खुद स्थिति सुधर जाएगी। धन्यवाद टीम उत्तरांचल ये एक अनछुवा पहलू ग्रामीण स्थिति पर आधारित उठाने के लिये।

Ankit Kumar

The best way to improve the plight of women in Uttarakhand is to educate people and encouraging women by giving examples of women empowerment. Tell them about schemes available for them.

1.Make a list of areas where women can play a vital role.

2. Make a list of available schemes for them.

3. Educate and encourage them by giving examples of historian women like Rani Laxmi Bai, Mrs. Indira Gandhi, Kalpana Chawla and many more.

4. Also, educate Men about the importance of women and encourage them to provide complete support to women. If above steps are followed, definitely the condition of women will improve in our state. India will be proud of all Daughters of Uttarakhand.

 

Manoj Bhandari

Manoj Bhandari


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